आज संसद में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक बिल विपक्ष का विरोध

इस समय देश में सबसे ज्यादा चर्चा जीस बात की हो रही है वह है वक्फ बिल जिसको लेकर बिहार तमिलनाडु और कई राज्यों सहित मुस्लिम संगठनो ने भी इस पर विरोध जाता चुके है वही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हम इस बिल का विरोध करेंगे वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वक्फ में सुधार समय की मांग है जबकि हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल , वक्फ को बर्बाद कर देगा |

ऐसे अब देखना होगा कि सरकार जो बिल पेश करने जा रही है उसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सरकार का साथ देते हैं या नहीं इसके साथ-साथ विपक्ष के कितनी पार्टी के सांसद सरकार का साथ देते हैं |

वक्फ बिल क्या है

अलग अलग विद्वानों के अनुसार भारत में वक्फ की अवधारणा दिल्ली सल्तनत के समय से चली आ रही है जिसमें सुल्तान मोइनुद्दीन सिम और मोहम्मद गौरी की ओर से मुल्तान की जामा मस्जिद को एक गांव समर्पित कर दिया गया था साल 1923 में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान मुसलमान वक्त अधिनियम से विनियमित करने का पहला प्रयास था |

वक्फ में क्या कब क्या

साल 1954 में स्वतंत्र भारत में वक्त अधिनियम पहली बार संसद की ओर से पारित किया गया था | साल 1995 में से एक नए वक्त अधिनियम से बदल गया जिस वक्फ बोर्ड को और ज्यादा शक्ति दी गई शक्ति में इस इजाफा के साथ अतिक्रमण और वक्त संपत्तियों के अवैध पट्टे और बिक्री की शिकायतें भी बढ़ गई | एक बार फिर साल 2013 में अधिनियम में संशोधन किया गया जिसमें वक्फ बोर्ड को मुस्लिम दान के नाम पर संपत्तियों का दावा करने के लिए असीमित अधिकार प्रदान किए गए संशोधनों ने वक्त अधिनियम की बिक्री को असंभव बना दिया |

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार वक्फ बिल में 40 बदलाव करना चाहती है पांच प्रमुख वजह जो सरकार बदलाव करना चाहती है

एक महत्वपूर्ण बदलाव वक्त द्वारा उसे के कांसेप्ट को समाप्त करना है जो धार्मिक उद्देश्यों के लिए लगातार प्रयोग की जाने वाली मस्जिदों या कब्रिस्तान जैसी संपत्तियों को बिना किसी दस्तावेज़ के भी रूप में मान्यता देता है संशोधन के तहत अब उत्तराधिकारी वक्त की आवश्यकता है यह संभावित रूप से उन्हें ऐतिहासिक स्थलों को प्रभावित कर सकता है जिन्हें औपचारिक रिकॉर्ड नहीं है

बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्य इसके अलावा अब राज्य वक्त बोर्ड में गैर मुस्लिम सीईओ हो सकते हैं साथ ही प्रत्येक राज्य बोर्ड में काम से कम दो गैर मुस्लिम सदस्य शामिल होने का भी प्रस्ताव है जो लोग विधेयक के समर्थन में उनका मानना है इन सुधारो से वक्त के शासन के सुधार होगा अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा और वक्त संपत्तियों के दुरुपयोग से रोका जा सके इसके अलावा की निगरानी शुरू करके और कलेक्टर को सशक्त बनाकर प्रबंधन को अधिक जवाब देय बनाना है वक्त बिल पर विवाद क्यों संपत्तियों पर अतिक्रमण बनी चुनौती

वक्फ कानून में कब कब बदलाव हुए

वक्त संपत्तियों से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अतिक्रमण है इस समस्या निपटाने के लिए कानून में वक्त वहीं पर अवैध रूप से कब्जा करने वाला उसका दुरुपयोग करने में दोषी पाए जाने के लिए करवा सहित कठोर दांत का प्रावधान है 2013 का संशोधनों ने इन सुरक्षाओं और और मजबूत किया जिसमें वक्फ संपत्तियों की बिक्री एक्सचेंज या ट्रांसफर कर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया

वक्त अधिनियम प्रस्तावित बदलाव सरकार ने वक्त अधिनियम में बड़े संशोधन पेश किए हैं जिसका उद्देश्य उन संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक और सूर्यास्त बनाना है सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावना में से एक है कानून का नाम बदलकर यूनिफाइड वर्क मैनेजमेंट एंपावरमेंट एफिशिएंसी एवं डेवलपमेंट 1955 1995 करना है बिल में प्रस्तावित संसाधनों के तहत केवल वेद स्वामित्व वाले व्यक्ति हैं वक्त बना करते हैं जिससे स्पष्ट संपत्ति दावों से उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके वक्फ घोषित की गई संपत्तियों में यह अधिनियम में लागू होने से पहले आबादी में सरकारी भूमि शामिल नहीं हो सकती है

नोट : यह जानकारी अलग अलग श्रोतो से लिया गया है |

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